आधुनिकता के चपेट में हैं 21 प्राचीन शिवलिंग, 16वीं सदी में नागवंशी राजाओं ने करवाया था निर्माण

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Updated on 19 Mar, 2017 at 3:58 pm

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कथित आधुनिकता हमारे प्राचीन धरोहरों को लील रही है। रांची के स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम के तट पर स्थित 21 प्राचीन शिवलिंग नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

नदी के बीच चट्टानों पर अलग-अलग आकार के बने ये शिवलिंग अब प्रदूषण और नदी के अम्लीय प्रभाव से मिटते जा रहे हैं। इनके नष्ट होने में सरकारी उदासीनता को भी एक ब़ड़ा कारक माना जा सकता है। इन 21 शिवलिंगों के क्षरण की शुरुआत वर्ष 1930 में आई भीषण बाढ़ की वजह से हुई थी।

बाढ़ की वजह से चट्टान खिसकते चले गए।

अब यहां केवल 13 शिवलिंग दिखाई दे रहे हैं। सरकारी उदासीनता की हद इतनी है कि न तो इन शिवलिंगों को खोजने का काम चल रहा है, और न ही इनके पुनरुद्धार की कोई कोशिश हो रही है।


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मान्यताओं के मुताबिक, इन शिवलिंगों का निर्माण 16वीं सदी में नागवंशी राजा लालप्रताप राय ने करवाया था। यहां का जनजातीय समाज आज भी शिवभक्ति करता है। यह उनकी परंपराओं में है। स्थानीय लोग अपने स्तर पर इनकी देखरेख या मरम्मत में जुटे होते हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर काम नहीं हो रहा है।

इन शिवलिंगों के संबंध में न तो आधिकारिक दस्तावेज है और न ही कोई रिकॉर्ड।

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