आमिर ख़ान के नाम खुली चिठ्ठी: इतना बड़ा बदलाव क्यों महसूस कर रहे हैं आप?

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4:01 pm 8 Jan, 2016

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प्यारे आमिर खान,

आप मेरे पसंदीदा कलाकार हैं। क्षेत्र चाहे अदाकारी का हो या सामाजिक कार्य का, मैं आपको सदैव सशक्त व्यक्तित्व का धनी मानता हूं। कला के क्षेत्र में आपके जीवंत अभिनय ने आपका कद बढ़ाया, तो साथ ही आपके सराहनीय सामाजिक कार्यों की वजह से आपके प्रतिभा की सराहना की गई।

लेकिन एक बात मेरे समझ से परे है कि आपने किस मूड़ में आकर वह असहिष्णुता वाली बात कर दी थी? जिसका खामियाज़ा आपको भुगतना पड़ा। पूरे देश में आपका विरोध हुआ। आपको पाकिस्तान भेजने तक की बात को झेलना पड़ी। यही नहीं, ‘अतुल्य भारत’ के आप ब्रांड एम्बेसेडेर थे, जिसे करार ख़त्म होने की बात कह कर इस गरिमा को गवाना पड़ा।

बेशक मैं आपका अकेला प्रशंसक नहीं हूं, मेरे ही तरह करोड़ों को आपकी अदाकारी प्रेरणा देती है। पर मुझे आपकी असहिष्णुता बयान से काफ़ी ठेस पहुंची थी। ठीक है, आपने अपने बयान का खंडन भी किया। लेकिन एक प्रशंसक होने के नाते मैं यह कहना चाहता हूँ की हम भारतीय काल्पनिक फिल्मों को अपने ज़िंदगी के कैनवस पर हक़ीकत में बदल कर जीते हैं। हम फिल्मों से सीखते हैं और नायक को असल ज़िंदगी में परिवर्तित करने का प्रयास करते हैं।

बात चाहे “तारे ज़मीन पर” के राम शंकर निकुम्ब की हो, जिसमें एक बालक के भय को दूर कर यह संदेश देना हो कि हर बच्चा विशेष है। वहीं “रंग दे बसंती” के दलजीत ‘डी जे’ ने मुझे हंसते रुलाते, मुझे हिंदुस्तानी होने के ज़ज्बे को और सुदृढ़ कर दिया। “लगान” के भुवन ने अपनी जमीनी हक के लिए सबकुछ न्योछावर कर लड़ जाने को प्रेरित किया। तो वही ‘सत्यमेव जयते ” मे करोड़ों भारतीय के साथ रोकर यह एहसास करवाया कि वाकई हममें बदलाव कि जरूरत है।


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बहुत दिनों से आपसे कुछ पूछना चाह रहा था। जो समय के अभाव की वजह से नही पूछ पाया। खैर आज वक़्त मिला तो यह पत्र आपके नाम लिख रहा हूँ।

प्रश्न यह है कि, आप अचानक कुछ महीनों में इतना बड़ा बदलाव कैसे महसूस करने लगे थे? मैं एक बार यह मानने को तैयार भी हो जाऊँ कि पिछले कुछ 8-9 महीनों मे असहिष्णुता का माहौल है, पर क्या आपका बयान ऐसे माहौल मे उचित था? आप प्रेरणादायक हैं, क्या आपको नहीं लगता, मेरे जैसे करोड़ों प्रशंसकों के मन मे असहिष्णुता का संदेह भय उत्पन्न करेगा? क्या वाकई ऐसा माहौल है कि मुझे डर के रहना चाहिए?

बेशक आपका और आपकी धर्मपत्नी का चिंतन अपने परिवार के प्रति शत-प्रतिशत उचित था। अपने बच्चे की उज्ज्वल भविष्य की कामना भी आप करेंगे ही करेंगे। परंतु क्या भविष्य में उसके प्रति यह जवाबदेही नहीं बनेगी कि जिस देश ने आपको इतना कुछ दिया, आपने उसको छोड़ देने की बात भी सोची थी ? क्या तब आप कमजोर नहीं पड जाएंगे? या सच में ऐसा माहौल था या है अभी इस देश में कि वह डर कर जीता है?



भारत ने आपको सदा प्यार और सम्मान दिया है। मुझे याद है ” फ़ना” फ़िल्म, जिसमें आपने अब्दुल कादिर नाम के पात्र का अभिनय किया था। आप आतंकवादी बन कर एक कश्मीरी लड़की से प्रेम रचते हैं। एक हिन्दुस्तानी के लिए यह असहज होगा, क्योंकि हम भोले भाले लोग हैं, हम हर फिल्म हर पात्र को खुद में ढूढँते हैं। हमने कितनी ही बार आपसे सुना है कि आप अपने पात्रों को जीते हैं। ठीक उसी तरह हम भी फिल्मों को जीते हैं। फिर भी हमने इस फ़िल्म को भी प्यार दिया, क्योंकि हम आपके व्यक्तित्व को भलीभाँति जानते थे ।

यहाँ मैं फिल्मों की बात इसलिए कर रहा हूँ। क्योंकि हमें प्रेरणा मिलती है और हो सकता है आपके उस असहिष्णुता के विचार से मैं भी भयभीत हो जाता।

फिर भी आप स्वतंत्र हैं। आप अपने विचार प्रकट कर सकते हैं। बात चाहे धर्मपत्नी के भय की हो या सामाजिक दृष्टिकोण की। फिर भी एक आग्रह करना चाहूँगा, अगर आप वाकई इस देश में रहने से कभी भयभीत हों तो आप भयभीत मत होइएगा। आप मेरे घर कभी भी आकर निःसंकोच रह सकते हैं। मेरा भी घर उसी भारत में है, जहाँ भगवान-खुदा के साथ-साथ कर्म और कला को पूजा जाता है, भय को नहीं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): प्रस्तुत विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति टॉपयॅप्स उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं   वैसे ही प्रस्तुत की गयी हैं  जैसा लेखक ने प्रस्तुत किया है ।


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