महिला सशक्तिकरण पर अमृता प्रीतम की ये 7 कविताएं आज भी प्रासंगिक हैं

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Updated on 10 Sep, 2018 at 6:47 pm

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अमृता प्रीतम महिला सशक्तिकरण पर अपनी लेखनी को लेकर प्रसिद्ध रही हैं। उन्हें पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है। उन्होंने करीब १०० पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है। अमृता प्रीतम उन साहित्यकारों में थीं जिनकी कृतियों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। हम यहां उन कृतियों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जो महिला सशक्तिकरण पर आधारित रही हैं।

अमृता की महिला सशक्तिकरण पर आधारित कविताएं।

1. धूप का टुकड़ा

यह कविता भीड़ में अकेलेपन की कहानी है। यह कविता अंधकार में उजियार के तलाश, उसके लिए इन्तजार की कहानी है।

2. अज्ज आखां वारिस शाह नूं

पंजाबी भाषा में लिखी गई यह बेहद प्रसिद्ध कविता है। इस कविता में भारत विभाजन के समय पंजाब में हुई भयानक घटनाओं का अत्यंत दुखद वर्णन है। इस कविता को भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में सराहना मिली थी।

3. एक मुलाकात

यह ऐसे प्रेमी जोड़े की दास्तान है, जो मिल नहीं पाते हैं।

4. खाली जगह


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यह कविता भी प्रेम की दास्तान है। दुःख को बेहद खूबसूरती से इसमें पिरोया गया है।

5. सिगरेट

यह एक महिशा सशक्तिक की अविष्णरणीय मिसाल है। जब पुरुषों के सिगरेट पीने पर भी तंज कसा जाता था, उस दौर में अमृता प्रीतम ने इस तरह की कविता को लिखने का साहस दिखाया था।

6. अम्बर की पाक सुराही

यह संवेदनशील कविता प्रेम को समर्पित है।

7. मैं तैनू फिर मिलांगी

यह कविता बेहद खूबसूरत है। यह कविता प्रेमियों के वायदे पर आधारित है। वे फिर मिलने का वायदा करते हैं।

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