संगम नगरी इलाहाबाद का नाम तो बदल गया, मगर सूबे की तस्वीर कब बदलेगी?

Updated on 18 Oct, 2018 at 3:43 pm

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साल 2019 में होने वाला कुम्भ मेला इलाहाबाद में नहीं होगा! घबराइये नहीं, कुंभ में नहाने वालों के लिए स्थान नहीं बदला है। गंगा और जमुना का संगम स्थल वही है, अगर कुछ बदला है तो वो है शहर का नाम, जिसे बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है।

 

योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इलाहाबाद का 444 साल पुराना नाम बदलकर प्रयागराज करने का फैसला किया।

 

इलाहाबाद का नाम अब प्रयागराज- Name OF Allahabad Has Changed To Prayagraj

newsworldindia


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बीते लंबे समय से इलाहाबाद के नाम को बदलने का प्रस्ताव विचाराधीन था, जिसे अब आधिकारिक तौर पर स्वीकृति मिल गई है। बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के फैसले को मंजूरी दी गई। भारत के 14 प्रयाग स्थलों के राजा कहे जाने वाले इस शहर को सदियों बाद अपना पुराना नाम वापस मिल गया है। लेकिन इस सबके बीच एक सवाल जो मुंह बाए खड़ा है वो है क्या इससे सूबे की बुनियादी तस्वीर में क्या कोई बदलाव आएगा।

 

 

उत्तर प्रदेश देश का वो राज्य है जहां आज भी दुनिया की कुल आबादी के आठ प्रतिशत गरीब रहते हैं। यहां आज भी जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दरकार है। देश में हो रहे शहरीकरण, औधोगिकरण और बदलती जीवन शैली के बीच उत्तर प्रदेश के बहुत से गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।

राज्य की एक बहुत बड़ी आबादी आज भी समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। यहां सड़कों की स्थिति खराब है। ग्रामीण इलाकों में केवल 2-3 घंटे ही बिजली रहती है। स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वसुलभ बनाना राष्ट्रीय दायित्व है, मगर यहां नीति नियंता अपना दायित्व निभाने कभी नहीं आते।



 

 

भले ही दशकों से उत्तर प्रदेश के लोगों की उदासीनता को किसी ने महसूस न किया हो, लेकिन राज्य के एक प्राचीन शहर के नाम को बदलने की कवायद काफ़ी लंबे समय से चल रही थी, जिसका रास्ता अब पूरी तरह साफ़ हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है इलाहाबाद का नाम बदल देने से उत्तर प्रदेश में राजनीतिक, सामाजिक, एतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, लेकिन इसके साथ एक प्रश्न ये भी है क्या इससे राज्य में आर्थिक विकास की संभावनाओं में कोई बढ़ोत्तरी होगी?

 

अगर नाम बदल लेने से कोई बदलाव होता, तो हर गरीब अपना नाम शंहशाह रख लेता।

 

बता दें हाल ही में प्रयागराज (इलाहाबाद) के कैंट क्षेत्र में दुर्गापूजा पंडाल में एक व्यक्ति को गोलियों से भून दिया गया। यह गोलियां दुर्गा पूजा पंडाल में चली। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले बदमाश मौके से फरार भी हो गए। मामले की जांच जारी है। ऐसे में नाम तो बदल बदल गया लेकिन सूबे की तस्वीर कब बदलेगी जनाब!

 

 


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