एयरलिफ्टः गणतंत्र दिवस पर देश प्रेम का तड़का; सच के करीब है अक्षय कुमार की यह फिल्म

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Updated on 23 Jan, 2016 at 12:59 pm

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भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म एयरलिफ्ट एक सच्ची घटना पर आधारित है। निर्देशक राजा कृष्णा मेनन ने सिल्वर स्क्रीन पर उतारे गए इस फिल्म में देश प्रेम का जबर्दस्त तड़का लगाया है। इस फिल्म का कथानक करीब 26 साल पहले वर्ष 1990 में कुवैत और इराक के युद्ध में फंसे 1 लाख 70 हजार भारतीयों को देश वापस लाए जाने की घटना पर आधारित है।

एयरलिफ्ट की कहानी और किरदार बिल्कुल सच्चे हैं और परदे पर आप जो कुछ भी देखेंगे वह सब सच के बिल्कुल करीब है। इस फिल्म की अधिकतर शूटिंग दुबई से करीब चार घंटे की दूरी पर स्थित रसेल खेमा में की गई थी। यही नहीं, गुजरात के भुज और राजस्थान में भी शूटिंग को अंजाम दिया गया।

कहानी: रंजीत कात्याल (अक्षय कुमार) कुवैत का एक नामी बिजनेसमैन है। वह शहर में पत्नी अमृता कात्याल (निमरत कौर) और बेटी के साथ रहता है। एक रात उसे खबर लगती है कि इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया है और कुवैतियों को चुन-चुन कर मारा जा रहा है। कुवैत की पूरी सरकार भाग खड़ी होती है, यहां तक कि कुवैत के भारतीय दूतावास को भी बगदाद ट्रान्सफर कर दिया जाता है।


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हालात खराब होते हैं और रंजीत का परिवार दूसरे भारतीय नागरिकों के साथ फंस जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और अधिकारी अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ हो नहीं पा रहा। ऐसे में रंजीत कात्याल अपने सम्पर्कों की बदौलत परिवार व दूसरे भारतीयों को निकालने का बीड़ा उठाता है। और इस तरह शुरू होता है, दुनिया का सबसे बड़ा राहत और बचाव अभियान।

एक्टिंगः इस फिल्म में अक्षय ने कुवैत में रह रहे रंजीत कत्याल की भूमिका को निभाया है। एक बाद एक लगातार खास तरह की फिल्मों में नजर आ रहे अक्षय कुमार ने एयरलिफ्ट में एक बिजनेसमैन के साथ-साथ एक पति, एक मालिक और एक भारतीय के रुप में दिल को छू लेने वाली एक्टिंग की है। पत्नी अमृता कात्याल की भूमिका में निमरत कौर ने अच्छा काम किया है। पूरब कोहली और इनामुल हक भी अपनी भूमिकाओं में खरे उतरे हैं।

निर्देशनः अपने अभिनव निर्देशन के बल पर इस फिल्म को नया आयाम दिया है निर्देशक राजा कृष्णा मेनन ने। फिल्म की कसी हुई स्क्रिप्ट दर्शकों को कुर्सी से बांध कर रखती है। इसमें बॉलीवुड के अंदाज में डायलॉग ठूंसे नहीं गए हैं और न ही एक्शन के सीन जबरन डाले गए हैं।

संगीतः फिल्म का कथानक इतना कसा हुआ है कि इसमें संगीत की जरूरत नहीं थी। इसके बावजूद इसमें फिल्माए गए गाने सीन के हिसाब से सटीक हैं।

देखें या नहींः यह फिल्म अक्षय कुमार की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। यह असरदार है। अगर आप अच्छी फिल्में देखने का शौक रखते हैं तो इस फिल्म को मिस नहीं करना चाहिए।


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