अगस्ता वेस्टलैंड पर फंस गई है कांग्रेस, रियायत देने के मूड में नहीं है सरकार

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Updated on 27 Apr, 2016 at 11:56 am

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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा मामला वैसे तो कई साल पुराना है, लेकिन इटली के मिलान कोर्ट के फैसले के बाद भारत में राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है।

आमतौर पर खामोश रहने वाले कांग्रेस पार्टी का ट्वीटर अकाउन्ट मंगलवार की शाम को व्यस्त था।

लेकिन देर शाम तक यह साफ हो गया था कि अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा कांग्रेस पार्टी और नेताओं के लिए भारी पड़ने जा रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को रियायत देने के मूड में नहीं दिख रही। इसकी वजह यह है कि मिलान के कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि इस सौदे में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।

फैसले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम चार बार लिखा गया है।

यही नहीं, उनका जिक्र मेन ड्राइविंग फोर्स के तौर पर किया गया है। 225 पन्नों के इस फैसले में सोनिया के मुख्य सलाहकार अहमद पटेल का भी जिक्र है।

अभी-अभी इशरत जहां के मामले में मुंह की खाने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए यह वाकई संकट का वक्त है।

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा मामले में फैसला देने वाली मिलान की इस अदालत को भारत के हाईकोर्ट के समतुल्य माना जाता है। इस अदालत ने सौदे में रिश्वतखोरी के आरोप में अपने देश के अधिकारियों को दंडित किया है। अब इसकी आंच भारत तक पहुंच गई है।

सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ही नहीं, बल्कि इस मामले में वर्ष 2005-07 में भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे एयर मार्शल एसपी त्यागी भी फंसते दिखाई पड़ रहे हैं।

मिलान की इस कोर्ट ने माना है कि अति-विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए खरीदे जाने वाले इस हेलिकॉप्टर के सौदे पर मुहर लगाने के लिए एअर मार्शल त्यागी और भारतीय अफसरों को 1.5 करोड़ डॉलर तक अवैध धन दिया गया।

अदालत ने इन्हीं आरोपों के तहत फिनमेकेनिया कंपनी के प्रमुख गुइसिए ओरसी को दोषी भी पाया है और सजा भी सुनाई है।

कांग्रेस पार्टी की दलील

कांग्रेस पार्टी के पास अपनी सफाई में यह मजबूत दलील है कि आगस्ता वेस्टलैंड सौदा संप्रग सरकार ने रद्‌द कर दिया था और इटली की सरकार को दिया गया सारा धन वापस ले लिया गया था।


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इस बीच, भारतीय रक्षा मंत्रालय इटली की अदालत के फैसले की प्रति का इंतजार कर रहा है। इसके लिए सीबीआई ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से इटली स्थित भारतीय दूतावास से फैसले की कॉपी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान जानकारी ली है।

फैसले की प्रति आने के बाद देश में राजनीतिक पारा भी चढ़ने के पूरे आसार हैं।

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