शिव के उपासक होते हैं अघोरी साधु, जानिए 12 अन्य रहस्यमय तथ्य

Updated on 30 Jan, 2017 at 6:15 pm

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अघोर पंथ हिन्दू धर्म का एक संप्रदाय है। इसका पालन करने वालों को अघोरी कहते हैं। अघोर पंथ की उत्पत्ति के काल के बारे में अभी निश्चित प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन इन्हें कपालिक संप्रदाय के समकक्ष माना जाता है।

इस पंथ का पालन करने वाले साधुओं की जीवनचर्या अप्रचलित और सभ्य समाज से अलग होती है। यही वजह है कि लोगों में इनके प्रति जिज्ञासा का भाव अधिक होता है। जानिए इनके कुछ हैरान कर देने वाले अन्य तथ्य।

1. शिव भक्ति

अघोरी साधुओं को शैव संप्रदाय का माना जाता है, यानी कि वे शिव जी के उपासक हैं। उनका मानना है कि शिव ही वह एकमात्र ताकत है, जो इस दुनिया को अपने नियंत्रण में रखता है और निर्वाण का आखिरी सारथी है।

2. सार्वलौकिक दवा

अघोरियों का मानना है कि उनके पास इंसान की सारी बीमारियों और रोगों का इलाज है। वे लाशों में से असाधारण तेल निकालकर उनसे दवाइयां बनाते हैं, जिन्हें अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

3. कठोर परिस्थितियों में जीवन

अघोरी साधु दुनिया के सबसे कठोर और सख्त प्राणियों में से हैं। निर्जन-भूमि की झुलसाने वाली गर्मी हो या बर्फ से ढकी हुई कड़कड़ाती हिमालय की ठंड, वे हर मौसम में कपड़ों के बिना जीते हैं।

4. कोई विकर्षण नहीं

अघोरियों का मलिन रहने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। उनका मानना है कि परमात्मा के पास पहुंचने के लिए उन्हें छोटी-छोटी चीज़ों से विकर्षित नहीं होना चाहिए, जैसे की सफाई रखना और बदन ढकना। यही कारण है कि वे बाल कटाने को भी आवश्यक नहीं समझते हैं।

5. लाशों पर ध्यान करना

मन्त्र उच्चारण से मोहावस्था की स्थिति में आने के बाद, अघोरी श्मशान में ध्यान लीन हो जाते है। उनका मानना है कि इसी से उन्हें मोक्ष का मार्ग प्राप्त होगा।

6. वस्त्र हीनता


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अघोरी साधु बहुत ही कम कपड़े पहनते हैं और अपने नंगे शरीर से शर्माते नहीं हैं। वे दुनिया के सारे सांसारिक सुखों को ईश्वर से मिलन के लिए त्याग देते हैं और मानते हैं कि वस्त्र-हीनता भी उसी ईश्वर को पाने का एक ज़रिया है।

7. किसी से लिए कोई घृणा नहीं

अघोरी सांसारिक घृणाओं से कोसों दूर रहते हैं। अपने कर्म के आधार पर भगवान शिव के द्वारा दी गई सभी चीज़ों को सद्भावना के साथ स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार मोक्ष पाने के लिए यह करना आवश्यक है।

8. वस्त्र और आभूषण

अघोरी भले ही कपड़ों का त्याग कर देते हैं, परन्तु वे अपने शरीर को जलती चिता से बनी हुई राख से ढकते हैं। वे इंसान की हड्डी और कपाल को आभूषण की तरह पहनते हैं।

9. यौन अनुष्ठान

वे स्त्रियों के साथ सम्भोग करते तो हैं, लेकिन उनकी मर्ज़ी के बगैर उन्हें छूते भी नहीं। उनके साथ यौन क्रियाएं वे सिर्फ शमशान भूमि में लाशों के ऊपर करते हैं। यौन संबंध जब बनाए जाते हैं, उस वक्त ढोल बजाए जाते हैं। वे यह आनंद के लिए नहीं, बल्कि मोहावस्था की स्थिति में आने के लिए करते हैं।

10. नरमांस-भक्षण तथा मांस-भक्षण

अघोरियों को मनुष्य का मांस-कच्चा एवं पका हुआ खाते देखा गया है। यह प्रथा आश्चर्यजनक और ग़ैरकानूनी होने के बावजूद वाराणसी के गांठ पर खुलेआम प्रचलित है।

11. तांत्रिक शक्तियां

कहा जाता है कि ज़्यादातर अघोरियों के पास तांत्रिक शक्तियां होती हैं। वे काले जादू में माहिर होते हैं और जब वे मंत्रों का जाप आरंभ कर दे, तब उनमें अलौकिक शक्तियां आ जाती हैं।

12. गांजे का उपयोग

अघोरियों को खुले आम गांजे का दम लेते देखा जा सकता है। वे गांजे को नशे में चूर होने के लिए नहीं, बल्कि भक्ति और ध्यान में मदमस्त होकर परमेश्वर के निकट पहुंचने के लिए उपयोग करते हैं।

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