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फिल्मों को एडल्ट सर्टिफिकेट क्यों दिया जाता है? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

3:33 pm 5 Jun, 2018

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भारतीय फिल्म उद्योग में दुनिया की सबसे ज़्यादा फिल्में बनती हैं। हर साल सैंकड़ों फिल्में बनती हैं और हर एक फिल्म को बेहतर बनाने के लिए फिल्ममेकर स्क्रिप्ट से लेकर म्यूज़िक तक पर काफी ध्यान देते हैं। आइटम नंबर्स से लेकर धांसू डायलॉग- हर चीज़ को अपनी तरफ से परफेक्ट बनाने की पूरी कोशिश की जाती है। बॉलीवुड फिल्मों के दीवाने सिर्फ़ देश ही नहीं, विदेशों में भी बड़ी तादाद में मौजूद हैं, तभी तो हिट फिल्म करोड़ों का बिज़नेस करने में कामयाब हो जाती हैं। हालांकि, फिल्ममेकर को कुछ नियम-कायदों को ध्यान में रखकर ही फिल्म बनानी होती है और ये नियम-कायदे तय करता है सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन। इसे सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड कहा जाता है। यही संस्था यह तय करती है कि किस फिल्म को साधारण और किसे एडल्ट सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

 

CBFC certification

 

सेंसर बोर्ड का नाम तो आपने सुना ही होगा कि इसका काम बॉलीवुड फिल्मों को सर्टिफिकेट जारी करना है, मगर पिछले कुछ समय से ये फिल्मों को सेंसर यानी कांट-छांट भी करने लगी है। यदि इसे लगता है कि किसी फिल्म में दिखाए गए सीन पब्लिक के लिए ठीक नहीं है तो उसे हटाने के लिए कहा जाता है। फिल्म पद्मावती, उड़ता पंजाब और लिपस्टिक अंडर माई बुर्का की रिलीज़ में देरी की वजह सेंसर बोर्ड ही था जिसे फिल्मों के कुछ सीन और डायलॉग पर आपत्ति थी, फिर कांट-छांट के बाद फिल्म रिलीज़ की गई।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

वैसे आपको पता होना चाहिए कि सर्टिफिकेशन और सेंसरशिप में बहुत फर्क है। किसी फिल्म के सेंसरशिप मतलब है उसके विषय-वस्तु पर ध्यान केंद्रित करके ये देखना कि क्या यह फिल्म जनता के देखने लायक है। हालांकि, भारत जैसे विशाल गंठतंत्र में ये तय करना की जनता क्या देखे और क्या नहीं ठीक नहीं है।

 

हां कुछ हद तक ये तय करने की ज़िम्मेदारी सेंसर बोर्ड की होनी चाहिए मगर बहुत ज़्यादा नहीं, वरना वो कलात्मक आज़ादी के खिलाफ हो जाएगा।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

सर्टिफिकेशन का मतलब होता है फिल्म की विषय-वस्तु के हिसाब से उसे सर्टिफिकेट जारी करना यानी कोई फिल्म सिर्फ व्यस्कों के लिए है या इसे सब देख सकते हैं। सर्टिफिकेशन के लिए सिनेमा से जुड़े कुछ लो फिल्म देखते हैं और इसे देखने के बाद ये तय करते हैं कि फिल्म को कौन सा सर्टिफिकेट दिया जाए। यदि ज़रूरी हुआ तो फिल्म में कुछ सीन कट करने के लिए भी कहा ज सकता है। जब सेंसर बोर्ड फिल्म में किसी तरह का कट करती है तो फिल्म सर्टिफिकेट के ऊपर एक त्रिकोण का चिह्न बना होता है।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

सेंसर बोर्ड फिल्म को 4 तरह के सर्टिफिकेट देता है।


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1. यू (अप्रतिबंधित सार्वजनिक प्रदर्शन)

 

पारिवारिक फिल्मों को आमतौर पर यू सर्टिफिकेट दिए जाए हैं। ड्राम, लव स्टोरी, एज्युकेशनल, एक्शन, साइंस फिक्शन फिल्में जिनमें किसी तरह का एडल्ड कंटेंट नहीं होता, उसे ये सर्टीफिकेट दिया जाता है। कहानी के मुताबिक, यदि फिल्म में थोड़ी-बहुत हिंसा या सेक्स सीन है तो वो चल जाते है, मगर ये बहुत ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

2. यू/ए (12 साल से कम उम्र के बच्चे माता-पिता के साथ देखें)

 

जिन फिल्मों में थोड़ा एडल्ड कंटेंट और जो छोटे बच्चों के लिए सही नहीं है तो उसे यू/ए सर्टिफिकेट दिया जाता है। यानी बच्चे ये फिल्म देख तो सकते हैं मगर अकेले नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के साथ में। यदि फिल्म में कुछ सीन सेंसर बोर्ड को लगे कि ये 12 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए ठीक नहीं है तो उसे हटवा सकता है।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

3. ए (केवल व्यस्कों के लिए)

 

ये सर्टिफिकेट जिस फिल्म को दिया जाता है उसे सिर्फ 18 साल से ज़्यादा उम्र के लोग ही देख सकते हैं, क्योंकि ऐसी फिल्मों में नग्नता, डबल मीनिंग शब्द, गाली-गलौज और बहुत हिंसा होती है जो बच्चों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसलिए ऐसी फिल्मों को ए यानी एडल्ट सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, ऐसी फिल्मों में भी यदि ज़्यादा खुलापान या हिंसा नज़र आती है तो सेंसर बोर्ड कैंची चला सकता है।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

 

4. एस (केवल खास समूह के लिए)

एस सर्टिफिकेट वाली फिल्में आम जनता के लिए नहीं, बल्कि समाज के कुछ खास लोगों के लिए बनाई जाती है- जैसे, डॉक्टर, इंजीनयर, साइंटिस्ट आदि और केवल इन्हें ही ऐसी फिल्म देखनी की इजाज़त होती है।

 

एडल्ट सर्टिफिकेट (Adult Certificate )

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