एसिड अटैक पीड़िता बनी दुल्हन, पति ने कहा चेहरा नहीं, मैंने देखा दिल

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Updated on 27 Dec, 2016 at 11:20 am

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यह कहानी आम नही है। यह कहानी हमें बताती है कि इंसान के रूप में सिर्फ हैवान ही जन्म नहीं लेते बल्कि वो इंसान भी जन्म लेते हैं, जिनके लिए खूबसूरती मात्र बाहर से दिखने वाली काया न होकर, भीतर मन की सुंदरता होती है। कानपुर की रहने वाली शबीना एक आम लड़की थी लेकिन बारह साल पहले उस पर एसिड अटैक हुआ और उसकी जिंदगी की कहानी ने एक दर्द भरा मोड़ ले लिया।

शबीना को तबाह करने के लिए उस पर तेजाब फेंका गया था। लेकिन आज उसके पास वो सबकुछ है जो एक लड़की की ख्वाहिश होती है। कुछ साल पहले ही शबीना को उसके मन से प्रेम करने वाला शमशाद मिला और हाल ही में अब दोनो ने जिंदगी का हमसफर बनाने का फैसला ले लिया।

शबीना और मोहम्मद शमशाद ने हाल ही में शादी कर ली है और वह अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है। शबीना के पति मोहम्मद शमशाद कहते हैं-

“क्या हुआ अगर उसका चेहरा जल गया है? मुझे उसके मन से प्यार है। सुन्दरता भी एक न एक दिन ढल जाती है। बेदाग खूबसूरती से ज्‍यादा जरूरी है एक खूबसूरत मन होना।

एक वक्त ऐसा भी था जब शबीना के जिस्म के जख्म तो भर गए, लेकिन वो गुमसुम रहती थी।

शबीना के साथ वह घटना तब हुई जब शबीना की शादी वसीम नाम के एक आदमी से तय हो चुकी थी। ईद के पास उनकी शादी होने वाली थी लेकिन वसीम तब तक इंतज़ार नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने शबीना से अपने साथ भाग चलने के लिए कहा। शबीना ने ऐसा करने से मना कर दिया। बस वसीम को यही बात बर्दाश्त नहीं हुई और वो इस घिनौनी घटना को अंजाम दे बैठा।


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शबीना को जिंदगी की यह जंग जीतने में ‘सखी केंद्र’ नाम के एनजीओ ने बहुत साथ दिया। इस एनजीओ की मदद से 15 दिनों के भीतर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, शबीना के इलाज के के लिए परिवार के सामने काफी चुनौती थी, जिसके लिए उसके पिता ने अपना सब कुछ बेच दिया, तब भी पैसे काफी नहीं पड़े, तो इस एनजीओ की संस्थापक नीलम चतुर्वेदी ने और पैसों का इंतजाम करवाया। आठ ऑपरेशनों के बाद शबीना की भौहें, आंखें, और होंठ दोबारा बनाए जा सके।

इधर शमशाद की जिंदगी भी खुशहाल नहीं थी। उसकी बीवी उसे धोखा देकर उसके दो बच्चों को छोड़ कर, अपने प्रेमी के साथ भाग चुकी थी। ऐसे में शमशाद के बच्चों को शबीना ने मां की तरह प्यार दिया। ये देख कर शमशाद ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। हालांकि, जिंदगी का यह अहम फैसला लेने से पहले एनजीओ ‘सखी केंद्र’ ने शमशाद को काफी परखा।

शबीना के ससुरालवालों ने वादा किया है कि उसे बहुत खुश रखेंगे। शबीना भी निकाह के पहले कुछ बोल नहीं सकी, सिर्फ मुस्कुराती रहीं। दरअसल, उसे मुस्कुराने की वजह मिल गई है।

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