40 साल पहले मां ने भी जिसे ठुकरा दिया था वह बच्चा अब बन चुका है स्विट्ज़रलैंड का सांसद

Updated on 19 Jan, 2018 at 5:09 pm

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निकलॉस-सैमुअल गगर की कहानी आपको फ़िल्मी लग सकती है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सत्य है। मां ने इन्हें बचपन में ही त्याग दिया और ये भारत से स्विट्ज़रलैंड पहुंच गए। इतना ही नहीं, निरंतर संघर्ष और हौसलों ने इन्हें स्विट्ज़रलैंड का पहला भारतीय सांसद बना दिया।

ये हैं प्रवासी सांसद साहब निकलॉस-सैमुअल गगर!

कर्नाटक के उडुपी स्थित सीएसआई लोम्बार्ड मेमोरियल अस्पताल में 1 मई 1970 को जन्मे निकलॉस की मां ने उन्हें त्याग दिया। इसके बाद उन्हें एक स्विस जोड़े ने गोद ले लिया था। निकलॉस के नए माता-पिता, फ्रित्ज और एलिजाबेथ उन्हें लेकर केरल चले गए। उस समय निकलॉस केवल 15 दिन के थे। लगभग 4 साल बाद यह दंपत्ति निकलॉस को लेकर स्विट्ज़रलैंड चला आया।

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हालांकि, निकलॉस के नये माता-पिता की माली हालत उतनी अच्छी नहीं थी, लिहाजा थोड़े बड़े होने पर उन्हें माली और ट्रक ड्राईवर का काम करना पड़ा। साथ ही वह अपनी पढ़ाई पूरी करते हुए कई सामाजिक कार्यों से जुड़े। उन्होंने 1992 और 1993 के बीच अमेरिका के कोलंबिया शहर में एक अनाथालय में भी काम किया था।

निकलॉस ने एक बातचीत में कहाः



‘मेरी जैविक मां अनुसूया ने मेरे जन्म के तुरंत बाद मुझे डॉक्टर ईडी पीफ्लगफेल्डर को देते हुए अनुरोध किया था कि वह मुझे किसी ऐसे दंपत्ति को दे दें जो मेरा पालन-पोषण कर बेहतर भविष्य बना सकें। इसके बाद डॉक्टर पीफ्लगफेल्डर ने मुझे गगर दंपति (फ्रित्ज और एलिजाबेथ) को सौंप दिया था।’

निकलॉस 2002 में वो नगर पार्षद चुने गए। साल 2017 में एंजेलिकल पीपल्स पार्टी की तरफ़ से अल्पसंख्यक दल के टिकट पर वह स्विट्जरलैंड के सांसद चुने गए। भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित पीआईओ-सांसद सम्मेलन में भाग लेते हुए निकलॉस ने बताया कि देश में भारतीय मूल का नेता एक्टिव नहीं है, लिहाजा वह आगामी कई वर्षों तक स्विट्ज़रलैंड की संसद में शामिल होने वाले एकलौते भारतीय होंगे।

वहीं, निकलॉस अपनी सफलता के लिए अपनी जैविक मां अनुसूया को धन्यवाद देते हैं। हालांकि, वे उनसे मिलने में कामयाब नहीं हो सके, लेकिन अपनी जैविक मां की यादों को संजोने के लिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम अनुसूया रखा है।


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