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AAP के 21 विधायकों की सदस्यता पर संकट, जानिए क्या है पूरा मामला

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11:43 am 14 Jun, 2016

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दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 21 विधायकों की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद के दायरे से बाहर रखने से संबंधित दिल्ली सरकार के विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही AAP के उन 21 विधायकों की नियुक्ति पर सवालिया निशान लग गया है, जिन्हें दिल्ली सरकार ने संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया था। हालांकि, आम आदमी पार्टी का दावा है कि ये विधायक लाभ के पद पर नहीं हैं।

अब इन विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। आम आदमी पार्टी की सरकार पर आरोप है कि संविधान का उल्लंघन कर इन विधायकों को लाभ का पद दिया गया। राष्ट्रपति ने अयोग्य ठहराने की अर्जी निर्वाचन आयोग को भेज दी, जिसने अर्ध न्यायिक इकाई के रूप में विधायकों से जवाब मांगा है।

केजरीवाल ने साधा मोदी पर निशाना

राष्ट्रपति के इस आदेश के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार उन्हें काम नहीं दे रही है।

ये है पूरा मामला


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मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 13 मार्च 2015 को अपनी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त करने का आदेश पारित किया था। बताया गया कि ये विधायक दिल्ली में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में गड़बड़ियों की पड़ताल कर मंत्री को रिपोर्ट कर रहे थे, लेकिन उनके सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है।

दरअसल, 70 सदस्यीय विधानसभा में केजरीवाल की पार्टी के 67 विधायक जीते हुए हैं। नियम के मुताबिक दिल्ली में सिर्फ 7 विधायक मंत्री बन सकते हैं। ऐसे में पार्टी में असंतोष का मौहाल बन जाता। विधायकों को खुश करने के लिए अरविन्द केजरीवाल ने यह चाल चली।

संविधान के नियम के मुताबिक लाभ के पद पर बैठा कोई शख्स विधायिका का सदस्य नहीं हो सकता। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 2006 में इसी वजह से संसद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब सोनिया गांधी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष होने के साथ ही रायबरेली से सांसद थी।

एक शिकायत पर राज्यसभा सांसद जया बच्चन की संसद सदस्यता खतरे में पड़ गई थी। तब जया बच्चन राज्यसभा की सांसद होने के साथ ही यूपी फिल्म विकास निगम की चेयरमैन भी थी।

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