हर कलाकार की मंजिल मुंबई नहीं होती; मिलिए रियल लाइफ हीरो सुरेन्द्र आनंद से

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Updated on 21 Feb, 2016 at 12:08 am

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दुनिया की भाग-दौड़ में आज हर शख्स बेबस सा नजर आता है। लोगों के पास दूसरों को देने के लिए समय नहीं है, लेकिन सुरेंद्र आनंद के साथ ऐसा नहीं है।

जी हां, सुरेंद्र आनंद आम लोगों की तरह ही रोज ऑफिस जाते हैं, लेकिन चुपचाप नहीं, बल्कि सबको गाना सुनाते हुए। सबके साथ गाते हुए। जो भी सुरेंद्र आनंद को सुनता है, वह उनकी आवाज़ का कायल हो जाता है। लोग मिलनसार आनंद को रियल लाइफ हीरो मानते हैं।

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आनंद कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और अगर वह सामाजिक नहीं है, तो उसमें और जानवरों में कोई फर्क नहीं है।

आनंद के घर के पास से सुबह 9 बजे निकलने वाली डीटीसी बस का ड्राइवर और कंडक्टर दोनों इनसे परिचित हैं। कई सवारियां भी इन्हें पहचानती हैं। इनके गानों का आनंद लेते हुए सवारियों का बोझिल सफर मजेदार हो जाता है।

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आनंद एक अच्छे गायक के साथ-साथ अच्छे पेंटर भी हैं। आनंद बताते हैं कि जब वह अकेला महसूस करते हैं, तो पेंटिंग की दुनिया में खो जाते हैं। एक नयी रचना उनके अंदर नए सिरे से ऊर्जा भर देती है।


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बसों, मेट्रों के साथ-साथ आनंद लोगों के बीच जाकर उन्हें अपने गीतों के जरिए जागरूक करते रहते हैं। आनंद के मुताबिक “आजकल कला का बाजारीकरण किया जा रहा है जो कि गलत है। हर कलाकार की मंजिल मुंबई ही नहीं होती है।”

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आनंद ‘जिंदादिली’ नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं। ‘जिंदादिली’ लेखक सुरेंदर आनंद के जिंदादिल होने की कहानी है। इस किताब में उन्होंने अपने अभी तक के अनुभव को साझा किया है।

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आइए देखते हैं, रियल लाइफ हीरो सुरेंद्र आनंद की कहानी।

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