मिलिए चार साल की बच्ची से जो दो साल में पढ़ चुकी है हजार किताब

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Updated on 18 Jan, 2017 at 10:05 pm

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किताबें भला किसका मन नहीं मोहतीं। वो हमारे ज़िन्दगी का अनमोल हमसफ़र बन के हमें सुकून तो पहुंचाती ही हैं, साथ में हमारे सुख-दुःख का साथी भी बन के रहती हैं। ऐसे ही नहीं कहा गया है कि ‘अगर बेहतर इंसान बनना हो तो किताबों से दोस्ती कर लीजिए।’ आज जिस 4 साल कि बच्ची से हम आपको मिलवाने जा रहे हैं, दरअसल उस मासूम को खुद नहीं पता कि उसका किताबों को सहेली बनाना आज चर्चा का विषय बन जाएगा।

जॉर्जिया की रहे वाली चार वर्षीय डालिया अराना अपनी इस छोटी सी ज़िन्दगी में 1,000 से ज्यादा किताबें पढ़ चुकी है। इस उपलब्धि के कारण उसे दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी ‘यूएस लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस’ में एक दिन के लिए लाइब्रेरियन भी बनाया गया।

डालिया ने एक दिन लाइब्रेरियन बनने का लुफ्त बेहतरीन ढंग से उठाया। इस खूबसूरत अनुभव में वहां की लाइब्रेरियन कार्ला हेडन भी डालिया के साथ थीं। अपने इस छोटे से कार्यकाल में कार्ला और डालिया ने साथ में मीटिंग्स की। दोनों लाइब्रेरी के स्टाफ से भी मिले और वहां के हॉल का भी जायजा लिया। डालिया ने लाइब्रेरी में व्हाइटबोर्ड भी लगाने का सुझाव दिया, जिससे बच्चे वहां लिखने का अभ्यास कर सकें।

कार्ला ने डालिया के साथ बिताये पलों को ट्विटर पर अपनी तस्वीरें के साथ यह लिखते हुए साझा कियाः


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“एक दिन की लाइब्रेरियन डालिया मैरी अराना के साथ काम करना काफी मजेदार रहा। उसने अभी ही 1,000 से ज्यादा किताबें पढ़ ली है।”

जिस उम्र में बच्चे पेंसिल पकड़ना भी नहीं सीख पाते उस उम्र में डालिया पढ़ना भी सीख चुकी थी। डालिया ने पहली किताब दो साल की उम्र में पढ़ी थी। यह देखकर उसकी मां ने उसे एक ऐसे प्रोग्राम में दाखिला दिला दिया था, जो बच्चों को किताबें पढ़ने कि लिए प्रोत्साहित करता है और यह भी ट्रैक रखता है कि बच्चे ने कितनी किताबें पढ़ ली हैं।

अनजाने ही तौर पर डालिया द्वारा यह कारनामा कर लिए जाने कि जानकारी, डालिया की मां ने ‘लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस’ को उसकी उपलब्धियों के  सम्बन्ध में एक पत्र लिख के दिया। इसके बाद लाइब्रेरी ने डालिया के पूरे परिवार को लाइब्रेरी बुलाया और डालिया को एक दिन का लाइब्रेरियन बनाने का प्रस्ताव रखा।

‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं’ यह मुहावरा डालिया के लिए एकदम सटीक बैठता है। साथ में यह भी जरूरी है कि उन माता-पिता को सलाम किया जाए ,जो बच्चों कि प्रतिभा को उनके बहुत छोटे उम्र में ही समझ जाते हैं और उनकी  लगन को दिशा देकर प्रोतसाहित करते हैं।

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