98 साल की उम्र में हुए MA पास, साल 1938 में हुए थे ग्रेजुएट

Updated on 27 Sep, 2017 at 6:43 pm

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किसी ने सच ही कहा है यदि दिल में कुछ करने का जज़्बा हो तो उम्र आड़े नहीं आती। कुछ ऐसा ही जज़्बा है, उत्तर प्रदेश के 98 वर्षीय राजकुमार वैश्य का। जी हां, अपने इसी जज़्बे की बदलौत 98 साल की उम्र में राजकुमार ने एमए की परीक्षा पास करके सबको हैरान कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रहने वाले राजकुमार ने हाल ही में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में सेकंड डिवीज़न से एमए की परीक्षा पास की है। साल 1920 में जन्में राजकुमार ने वर्ष 1934 में दसवीं पास करने के बाद वर्ष 1938 में इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएशन किया। फिर राजकुमार LLB करने में व्यस्त हो गए और 1940 में लॉ की परीक्षा पास की। वह एमए की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन बढ़ती पारिवारिक ज़िम्मेदारियों की वजह से वह मास्टर डिग्री पाने के अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए थे। हालांकि, यह सपना अब पूरा हो गया है।

नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एस. पी. सिन्हा के मुताबिक, ‘ राजकुमार बिलकुल आम छात्रों की तरह ही पेपर देने आये थे। उन्होंने कभी अपनी उम्र का लाभ उठाने की कोशिश नहीं की।’ राजकुमार के तीन बेटे हैं।


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राजकुमार का कहना है कि ‘जिस समय देश आज़ाद हुआ था मैंने गरीबी हटाओ का नारा सुना था। यह नारा आज भी मुझे अच्छी तरह से याद है। मैंने अपने बेटे से कहा है कि वो मेरे लिए अपने कैमरे से झोपड़पट्टियों की कुछ तस्वीरें खींचे, जिन पर मैं आर्टिकल और कविताएं लिखना चाहता हूं। इन कविताओं को मैं अख़बारों में भेजूंगा, जो मेरी तरफ़ से उसी नारे को समर्पित होंगी।’

राजकुमार कहते हैं कि इस उम्र में पढ़ाई में उनकी छोटी बहू ने बहुत मदद की। उनकी बहू पटना में इतिहास की प्रोफेसर है।

बहरहाल, इस उम्र में परीक्षा पास करके राजकुमार ने उन लोगों के लिए एक मिसाल पेश की है जो अक्सर कहते है ‘अब ये करने की उम्र है हमारी क्या’। उम्र तो बस एक संख्या है जिसका जज़्बे और हिम्मत से कोई लेना-देना नहीं है।


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