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90 के दशक की ये 11 चीज़ें देखकर यकीनन आपको भी अपना बचपन याद आ जाएगा

Updated on 5 September, 2018 at 7:36 pm By

स्मार्टफोन के इस जमाने में बच्चे भी पहले से काफी स्मार्ट हो चुके हैं। हालांकि, 90 के दशक के बच्चे आजकल के बच्चों की तरह स्मार्ट नहीं थे, क्योंकि न तो उनके पास स्मार्टफोन था, न इंटरनेट और लैपटॉप। यहां तक कि टीवी भी रंगीन नहीं था। उस दौर के बच्चों का बचपन बहुत अलग था। आप में से बहुत से लोगों को शायद अपना बचपन याद आ गया होगा। चलिए उस दौर की यादें ताज़ा करने के लिए हम आपको बताते हैं 90 के दशक की कुछ खास बातें, जो सिर्फ तभी होती थीं। अब ऐसा नहीं होता।


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कंचे खेलना

आजकल के बच्चों को शायद ही इस खेल के बारे में पता हो और अगर किसी को पता भी होगा तो वो इसे डाउन मार्केट समझते हैं। मगर उस दौर में ये लड़कों का फेवरेट खेल हुआ करता था।

 

 

कैसेट रिकॉर्ड करना

शायद आपने भी कई बार बचपन में कैसेट रिकॉर्ड किया होगा, क्योंकि तब आजकल की तरह इंटरनेट तो था नहीं कि जब चाहे अपना फेवरेट गाना सर्च करके सुन लो। उस सम तो गाना सुनने के लिए किसी दोस्त से कैसेट उधार लेनी पड़ती थी और कई बार रेडियो पर गाना बजने का इंतज़ार करते थे, ताकि उसे रिकॉर्ड कर सकें।

 

टॉफी


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उस जमाने में 25 और 50 पैसे में मिलने वाली ये टॉफी शायद ही किसी बच्चे ने न खाई हो। इसे देखकर शायद आपको भी अपना बचपन याद आ गया होगा, जब मम्मी से सामान लाने के बदले आप एक रुपए मांगकर ये टॉफी खरीदते थे।

 

वॉकमैन

उस जमाने में अगर किसी बच्चे के पास वॉकमैन है तो बाकि बच्चे उसे ऐसे देखते थे मानों उसके पास कोई बहुत अनमोल चीज़ हो और सारे बच्चे उसके आसपास जमा हो जाते थे। गाना सुनने के लिए ये तब का सबसे लोकप्रिय साधन था। लोग अक्सर वॉकमैन के साथ मॉर्निंग वॉक भी करते थे, जैसे आजकल आप अपने स्मार्टफोन के साथ करते हैं।

 

लैंडलाइन

अब तो लैंडलाइन फोन जैसे इतिहास बन गया है। उस ज़माने में ये घर की सबसे अहम चीज़ माना जाता था। इतना ही नहीं, जिसके घर में फोन नहीं होता था वो पड़ोसी के घर का नंबर दे देता था। यानी तब ये लैंडलाइन पड़ोसियों से भी रिश्ते मज़बूत करने के काम आता था।

 

 



 

मैसेज भेजना

फोन वाला मैसेज तो लोग अब भूल ही चुके हैं। व्हाट्सअप ने मैसेज का धंधा चौपट कर दिया, मगर 90 के दशक के बच्चों को नोकिया के फोन से मैसेज करना ज़रूर याद होगा, क्योंकि उसमें टच करने पर नहीं, बल्कि कई बार दबाने पर एक अक्षर आता था। ऐसे में मैसेज टाइप करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

 

 

रील कैमरा

अब तो फोटो खींचने या खिंचवाने का मन किया तो झट से स्मार्टफोन निकाला और अपनी सेल्फी निकाल या फिर दोस्तों के साथ फोटो खींचकर तुरंत देख लिया कि हम कैसे लग रहे हैं। मगर उस जमाने में ये सुविधा नहीं थी। तब तो रील वाले कैमरे थे, जिसमें फोटो खींचने के बाद वो कैसी आई ये देखने के लिए हफ्तों इतंज़ार करना पड़ता था।

 

 

ब्लैक एंड व्हाइट टीवी

आज के बच्चों के पास एलसीडी और एलईडी टीवी है, लेकिन 90 के दशक के बच्चों के पास ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था, जिसमें किसी चैनल को सर्च करने के लिए बार-बार बटन दबाना पड़ता था। कई बार तो पिक्चर क्लियर न आने पर छत पर जाकर बार-बार एंटिना घुमाना पड़ता था।

 

कंप्यूटर गेम्स

उस जमाने में जिस दोस्त के पास कंप्यूटर गेम होता था बाकि बच्चे उसकी खूब खुशामद करते थे, ताकि छुट्टी के दिन उसके घर जाकर गेम खेल सकें। मगर अब तो बच्चों के पास मोबाइल पर ही सारे गेम मौजूद हैं।

 

शॉपिंग

उस जमाने में बच्चे शॉपिंग के लिए त्योहार का इंतज़ार करते थे, क्योंकि तभी उन्हें नए कपड़े मिलेंगे और बाज़ार जाने पर उन्हें उनकी फेवरेट मिठाई खाने का मौका भी मिलेगा। अब तो जब बच्चे डिमांड करते है उसी समय पैरेंट्स ऑनलाइन कपड़े बुक कर देते हैं।

 

कैसेट ठीक करने के लिए पेंसिल का इस्तेमाल

कैसेट की रील को आगे-पीछे करने के लिए तब पेंसिल का इस्तेमाल किया जाता था और अगर गलती से रील अटक जाए या बाहर निकल जाए तो उसे भी पेंसिल से ही ठीक किया जाता था।


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