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90 का सुनहरा दशक और ये मजेदार पत्रिकाएं, आइए बचपन की ओर लौट चलते हैं

Published on 20 April, 2018 at 6:38 pm By

यदि आप 90 के दशक से हैं तो आपका बचपन भी आज की तुलना में बेहद अलग रहा होगा। उस समय न तो लोग टीवी के गुलाम थे और न ही कम्प्यूटरों ने आम घरों पर दस्तक दी थी। सबसे बड़ी बात कि उस दौर में बच्चों के हाथ स्मार्टफोन के जाल में नहीं उलझे थे, और दोस्त फेसबुक में नहीं बल्कि आस-पड़ोस में बनाए जाते थे।


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उन गर्मियों की दोपहर में कभी हम नाना-नानी की कहानियों में खोए रहते थे तो कभी मजेदार किताबों व पत्रिकाओं में। नैतिक शिक्षा तो हितोपदेश और पंचतंत्र से मिल जाती थी, और एक्शन प्रेमी नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्सों से अपनी कल्पना शक्ति को नई उड़ान दिया करते थे। इन सब के बीच शाम का वक्त काफी खास होता था, जब टीवी में डक टेल्स, मोगली और टेल स्पिन जैसे कार्टून शो हमें परम आनंद की अनुभूति करवाते थे।

यदि आपने भी ऐसा ही प्रदूषण रहित बचपन जिया है तो उस दौर में आने वाली कॉमिक्स व पत्रिकाएं आपको जरूर याद होंगी। कागज़ के उन पन्नों में तो जैसे हमारा पूरा बचपन ही समाया हुआ है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ बचपन और वे पत्रिकाएं, दोनों ही कहीं पीछे छूटते चले गए।

आज वह बचपन याद तो बहुत आता है, लेकिन मोबाइल में आए नोटिफिकेशन की तरह हम उन यादों को डिसमिस कर वापस अपनी व्यस्त जिंदगी की ओर मुंह कर लेते हैं। तो आइए आज यादों के इस नोटिफिकेशन को खोल ही लें, और लौट चलें अपने बचपन की ओर।

 

1. पंचतंत्र एवं हितोपदेश

इन किताबों को बचपन का सबसे अच्छा साथी माना जाता था। इन दोनों ही किताबों में कहानियों का संग्रह था। इन कहानियों की खास बात यह थी कि इनमें से हर कहानी के अंत में हमें कोई न कोई सीख दी जाती थी। इन किताबों से मिली सीख बच्चों के कच्चे दिमाग को सही दिशा देने का काम बखूबी करती थी।

 

2. अकबर-बीरबल की कहानियां

यह तो सभी बच्चों की मनपसंद किताबों में शामिल हुआ करती थी। सम्राट अकबर और उनके बेहद चालाक मंत्री बीरबल की इन कहानियों में बीरबल बड़ी से बड़ी समस्याओं के बेहद आसान और मजेदार समाधान ढूंढा करते थे।


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3. तेनाली रमन

सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर राज्य के कवी तेनाली रमन पर आधारित यह कॉमिक्स काफी लोकप्रिय हुआ करती थी। बीरबल की तरह तेनाली रमन भी बेहद चतुरता से हर समस्या का समाधान खोज लेते थे। तेनाली रमन की कहानियों पर कई टीवी शो व फिल्में भी बनी हैं, लेकिन जो मजा उन कॉमिक्स में था वह टीवी में कहाँ मिलने वाला है जनाब।

 

4. चाचा चौधरी

डायमंड कॉमिक्स की सबसे अनोखी रचना और शायद हमारे देश की सबसे लोकप्रिय कॉमिक्स यही थी। चाचा चौधरी और जुपिटर ग्रह से आया उनका साथी साबू बच्चों के करीबी दोस्त बन चुके थे। इस कॉमिक्स के ऊपर भी कई टीवी शो व कार्टून बनाए गए, लेकिन कोई भी उन कॉमिक्स की जगह नहीं ले पाया।

 

5. अमर चित्र कथा

अमर चित्र कथा में पौराणिक कथाओं को बेहद सरलता के साथ बच्चों के सामने पेश किया जाता था। भगवान राम, श्रीकृष्ण, ईसा मसीह जैसे अन्य कई पौराणिक किरदारों को बच्चों के दिल के करीब लेन का श्रेय इसी पत्रिका को जाता है।

 

6. चंदामामा

चंदामामा की कहानियों से बच्चों का लगाव देखते ही बनता था। इसमें मौजूद कहानियों के जरिए बच्चों को काफी कुछ सीखने भी मिल जाता था।

 

7. चम्पक

यदि पत्रिकाओं की बात हो रही है तो लोकप्रियता के मामले में चम्पक को पछाड़ पाना बेहद मुश्किल है। बच्चों के साथ बड़े भी इसे बेहद चाव से पढ़ते थे। इसमें कहानियां, चुटकुले व पहेलियों के अलावा और भी बहुत कुछ होता था। लगभग सभी घरों में इस पत्रिका का बेसब्री से इंतज़ार किया जाता था।



 

8. बालहंस

हर पखवाड़े भर बाद आने वाली इस पत्रिका को भी बच्चों के द्वारा काफी पसंद किया जाता था। इसमें कई अनोखी चीजें भी सीखने को मिल जाती थीं।

 

9. नन्हे सम्राट

यह पत्रिका कहानियों व मजेदार चुटकुलों के अलावा बच्चों को कई रोचक जानकारियां भी दे जाती थी।

 

10. बालसखा

हिंदी लेखक संघ के द्वारा निकाली जाने वाली यह बाल पत्रिका सर्वाधिक लोकप्रिय पत्रिकाओं में से एक थी। इस पत्रिका के शुरू होने से बच्चों के लिए लिखने वाले लेखकों की संख्या भी बढ़ी थी।

 

11. चकमक

विज्ञान में रूचि रखने वाले बच्चों के लिए यह एक आदर्श पत्रिका थी। इसमें विज्ञान के रहस्यों को बेहद सरल और रोचक तरीके से समझाया जाता था।

 

12. नंदन

यह पत्रिका हिंदुस्तान अखबार के द्वारा शुरू की गई थी। बच्चों के बीच आज भी इसकी काफी लोकप्रियता है, लेकिन उस समय में इसकी बात ही कुछ और हुआ करती थी। इसे चाचा नेहरू की याद में शुरू किया गया था।

 

13. गोकुलम

अंग्रेजी और तमिल में प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका में भी कहानियों व पहेलियों के अलावा कई रोचक जानकारियां छुपी हुई होती थीं। इस पत्रिका को दक्षिण भारत में भी काफी पसंद किया जाता था।

 

14. टेल मी व्हाई

यह मासिक पत्रिका पढ़ाकू बच्चों की सबसे अच्छी साथी थी। इसमें कई रोचक तथ्यों के बारे में भरपूर जानकारी मौजूद होती थी। इधर-उधर की मजेदार जानकारियों से बच्चों की जिज्ञासा तो शांत होती ही थी, साथ में उन्हें देश-दुनिया से जुड़ी असीम जानकारियां भी मिल जाती थीं।

 

15. टिंकल

यह पत्रिका अपने मजेदार किरदारों की वजह से काफी लोकप्रिय हुई थी। इसके किरदारों में से एक, कालिया कौवा तो आज भी लोगों की यादों में मौजूद है।


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टेक्नोलॉजी के विस्तार ने जब से बचपन को छुआ है, तब से इन पत्रिकाओं व किताबों की जरूरत ख़त्म सी हो गई है। आलम यह है कि आज के बच्चे किताबों से दूर भागते नजर आते हैं। आने वाली पीढ़ी के लिए सही माहौल तैयार करने की बात होती है तो ऐसा लगता है कि काश वह पुराना दौर एक बार फिर वापस आ जाए।

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