इन 9 महिला शक्ति के बारे में अगर आप जानेंगे तो उन्हें अबला समझने की गलती नहीं करेंगे

Updated on 16 Jun, 2018 at 10:06 am

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भारत महिला शक्ति का देश रहा है। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में महिलाओं का विशेष सम्मान रहा है। हालांकि, धीरे-धीरे उनकी स्थिति बदलती गई। आज जिस समय में हम जी रहे हैं, इसमें उनकी स्थिति किसी से छुपी नहीं है। आधुनिकता के नाम पर ही सही, महिलाओं को अपमानित करने की साजिश बदस्तूर जारी है। ऐसे में ये कुछ महिलाएं प्रेरणा बन रही हैं!

इच्छाशक्ति से अबला कही जानेवाली महिलाओं ने सबला होकर खुद को साबित कर दिखाया है। ये आज सबके लिए प्रेरणाबन चुकी हैं।

 

1. चेतना गाला सिन्हा

 

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चेतना ने शहर से गांव की ओर कदम बढ़ाया और गांव की महिलाओं के जीवन को सुधारने में जुट गईं। वर्ष 1997 में उन्होंने ‘माण देशी बैंक’ खोलकर महिलाओं की बेहतरी के लिए काम करना शुरू किया। यह बैंक आज ‘महिलाओं का, महिलाओं द्वारा और महिलाओं के लिए’ सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।

 

2. घिसी देवा

 

 

राजस्थान की रहने वाली घिसी देवा 11 अन्य महिलाओं के साथ मिलकर संस्था चलाती हैं। इस संस्था का नाम ‘दूं जमाता’ है जो अत्याचारी पतियों से लोहा लेने का काम करती हैं। इनका कहना साफ़ है कि बात से अगर नहीं साझे तो फिर डंडे से सझाएंगे। एक तरह से ये ‘पति सुधार अभियान’ में लगी हैं!

 

3. सपना तिग्गा

 

 

सपना भारतीय सेना की पहली महिला जवान हैं। इन्होंने अपना ये मुकाम 35 वर्ष की आयु में हासिल किया था और तब ये दो बच्चों की मां बन चुकी थीं। सपना ने अपने फिजिकल टेस्ट में अपने सभी पुरुष प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ दिया था।

 

4. इरोम शर्मिला

 

 

मणिपुर की आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने एएफएसपीए क़ानून के विरुद्ध लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहीं। आत्महत्या की कोशिश के जुर्म में उनकी गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन वे अडिग रहीं। साल 2016 में उन्होंने 16 साल के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्ति की घोषणा की।

 

5. मंजू सिंह

 

 

मंजू सिंह बेहद साहसी महिला हैं और ‘गुड़िया’ NGO की सदस्य हैं। इनको जान से मरने की धमकी मिलती रहती हैं, लेकिन उसकी परवाह किए बगैर ये लगातार महिलाओं और बच्चियों को जिस्मफरोशी के धंधे से बहार निकालने का काम करती हैं। ये मोक्ष नगरी काशी में अपनी संस्था के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर 1500 से ज़्यादा औरतों और बच्चियों को मुक्त कराया है।

 

6. दुर्गा शक्ति नागपाल

 

 

दुर्गा शक्ति नागपाल अपने नाम के अनुरूप ही भ्रष्टाचार के खिलाफ़ मोर्चा खोलने के लिए जानी जाती हैं। ये यूपी काडर की आईएएस ऑफ़िसर हैं और इन्होंने गौतम बुद्ध नगर में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाकर सबका ध्याम खींचा था। ग्रेटर नोएडा में एक मस्जिद की दीवार गिराने के आरोप में इनको जब सस्पेंड कर दिया गया, तब आम जनता ने कड़ा विरोध जताया था।

 

7. हर्षिनी कान्हेकर

 

 

बहुत ही कम लोग इस नाम से वाकिफ हैं लेकिन इन्होंने लीक से हटकर सोचा। हर्षिनी कान्हेकर भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं। इन्होंने लगभग 10 साल पहले ये करिश्मा कर दिखाया था। इनका कहना है कि महिलाएं जब चांद तक पहुंच सकती हैं, तो आग से लोगों की रक्षा क्यों नहीं कर सकती?

 

8. संपत पाल देवी

 

 

‘गुलाब गैंग’ फिल्म का नाम तो सूना ही होगा, वो इन्हीं पर आधारित है। औरतों के अधिकार और पुरुषों के अत्याचार पर इन्होंने हल्ला बोल दिया है और अपने साथियों सहित डंडे उठा कर चल दिए है। 16 साल की उम्र में ही इन्होंने अत्याचारी पतियों के खिलाफ़ मोर्चा बना लिया था।

 

9. रूपा देवी

 

 

फुटबॉल खेल में फीफा का अपना एक अलग नाम है और रूपा देवी भारत की पहली महिला रेफ़री के रूप में जानी जाती हैं। तमिलनाडु की रहने वाली रूपा ने चुनौतियों का सामना कर ये उपलब्धि हासिल की है। ताज्जुब की बात ये है कि फीफा द्वारा चयनित होने के बावजूद इन्हें अभी तक सरकारी नौकरी नहीं मिली है।

 


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ये सभी महिलाएं वाकई में स्तुत्य हैं जो अन्य दबी-कुचली महिलाओं के लिए न केवल सहारा बन रही हैं बल्कि प्रेरणा भी बन रही हैं!

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