ये वो 5 कारण हैं जो बिहार बोर्ड से पास हुए बच्चों को बना देते हैं लल्लनटॉप

Updated on 12 Jun, 2018 at 3:11 pm

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रिजल्ट का मौसम ही ऐसा होता है कि हर घर से कुछ न कुछ खबर आती है। किशोरों में इसको लेकर अजीब हलचल देखने को मिलता है क्योंकि ये बोर्ड परीक्षा के अभ्यर्थी होते हैं। यह अलग बात है कि ये खबर नहीं बन पाते। या यूं कहें कि ख़बरों में रहने वाले रिजल्ट तो बस सीबीएसई, आईसीएसई और बिहार बोर्ड का ही होता है।

 

सुर्ख़ियों के मामले में बिहार बोर्ड ही सबसे अव्वल है!

 

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बिहार बोर्ड है ही इतना ख़ास कि सबकी नजर बनी रहती है। हर साल कुछ न कुछ ऐसा खुलासा होता है कि इसे आप अखबारों की सुर्खियों में लगातार देख सकते हैं। आइये यहां बिहार बोर्ड की खासियतों का उल्लेख करते हुए उन पर प्रकाश डालते हैं।

 

1. फेल होने से नहीं, टॉप करने से डर लगता है साहेब!

 

 

दुनिया का ये पहला बोर्ड हैं, जहां छात्र टॉप नहीं करना चाहते हैं। आखिर टॉप करके कौन जेल जाए। नंबर कम हैं तो सेफ हैं वाली बात है। टॉप करते ही मीडिया वाले प्रश्नों की बौछार कर देते हैं और जवाब देते-देते वैसे ही बेचारे का कचूमर निकल जाता है। ये भी गौर करने की बात है कि पिछले कुछ सालों में बिहार बोर्ड के टॉपर फ़र्जीवाड़े में लिप्त पाए गए हैं।

 

2. पास होना है तो जुगाड़ चाहिए

 

 

बिहार बोर्ड में पास करना कोई खेल नहीं है। ये एक टीम वर्क होता है और इसमें सगे-संबंधियों का भी अहम रोल होता है। छात्र पढ़ने में लगा रहता है तो सगे-संबंधी लॉन्ग जंप, हाई जंप, गोला फेंक, दीवार चढ़ने की तैयारी में लगे रहते हैं। इन सबको मिलाकर ही रिजल्ट निकलता है।

 

3. फुल मार्क्स से भी पार हो जाते हैं स्कोर

 

 

बिहार बोर्ड ही ऐसा बोर्ड हैं जहां पढ़ाकू लोग फुल मार्क्स से भी अधिक ले आते हैं। टैलेंट की बात है और बिहार के लोग तो टैलेंटेड होते ही हैं। अन्य बोर्ड में जो कारनामे अपवाद के रूप में होते हैं, वो यहां जम के होते हैं। आखिर लिट्टी-चोखे का दम है भाई!

 

4. बोर्ड में फिसड्डी भी आईआईटी क्रैक कर लेते हैं

 

 

जी हां, अपने बिहार बोर्ड को क्या समझ रखा है आपने। आईआईटी क्रैक करने वाले छात्र भी बिहार बोर्ड पास करने में पानी मांगते फिरते हैं। ऐसा तो कई बार हो चुका है कि बंदा आईआईटी एडमिशन के लिए कॉलेज देख आया हो और बोर्ड ने उसे वापस बुला लिया हो। बिहार बोर्ड है, समझ क्या रक्खे हो!

 

5. रिजल्ट के बाद एडमिशन नहीं, आंदोलन होता है

 

 

रिजल्ट के बाद एक ओर छात्र एडमिशन कराने भागते हैं तो दूसरी ओर आंदोलन पर बैठ जाते हैं। आखिर 65 प्रतिशत बच्चे फ़ेल होने के बाद कर भी क्या सकते हैं। आन्दोलन ही रास्ता बचता है, क्या पता कल को इन्हीं में से कोई दिल्ली तक पहुंच जाए!

 

 

बिहार में शिक्षा की जो हालत है, उससे हम भी खासे चिंतित और दुःखी हैं। हालांकि, जब गलती पर गलती होती है तो फिर मजाक बनना लाजिमी है!


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