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भारत के ये तीन राज्य आज़ादी के सालों बाद देश का अभिन्न अंग बने

Updated on 3 September, 2018 at 6:44 pm By

आमतौर पर लोगों को लगता है कि भारत को सिर्फ़ अंग्रज़ों ने ही गुलाम बनाया था और आज़ादी के लिए भारतीयों को सिर्फ़ ब्रिटिश हुकूमत से ही लड़ना पड़ा। हालांकि, सच्चाई यह नहीं है। सच्चाई ये है कि अंग्रेज़ों के अलावा भी कई देशों ने भारत के कई राज्यों को गुलाम बनाकर रखा था। जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तब भारत और पाकिस्तान बनने के साथ ही तीसरा विकल्प भी था। कहा गया कि जो राज्य इन दोनों देशों में विलय नहीं चाहते थे, वो अलग अस्तित्व बनाए रख सकते हैं। हालांकि, अधिकांश राज्यों ने भारत के साथ जाना ही उचित समझा। जम्मू कश्मीर 26 अक्टूबर 1947 में भारत का हिस्सा बना, जबकि हैदराबाद 24 नवंबर 1949 को।


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बावजूद इसके तीन राज्य ऐसे थे जो आज़ादी के समय भारत का हिस्सा नहीं थे।

1. गोवा

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत की आज़ादी के 14 साल बाद गोवा भारत का हिस्सा बना। गोवा पर कभी भी अंग्रेजों का राज नहीं थी, बल्कि यह पुर्तगालियों के कब्जे में था और उन्होंने इस पर करीब 450 साल राज किया। ऐसा माना गया कि भारत की आज़ादी के बाद पुर्तगाली खुद ही गोवा को आज़ाद कर देंगे, मगर ऐसा हुआ नहीं। उनका तर्क था कि कैथलिक लोग भारत में सुरक्षित नहीं रहेंगे।

 

 


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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गोवा में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से मना कर दिया, लेकिन 1955 में जब सत्याग्रह शुरू हुआ तो पुर्गालियों ने लोगों पर गोलियां दागी, जिसमें 20 निर्दोष लोग मारे गए। इसके बाद नेहरू ने गोवा पर सैन्य कार्रवाई करते हुए वहां के राज्यपाल को इस बात के लिए मजबूर कर दिया कि गोवा को भारत हिस्सा बन जाए।

 

2. पॉन्डिचेरी

भारत की आजादी के 6 साल बाद पॉन्डेचेरी भारत का हिस्सा बना। पॉन्डिचेरी फ्रांसिसियों के कब्जे में था। 1674 में व्यापार के उद्देशय से फ्रांसिसी पॉन्डिचेरी आए थे और उसके बाद धीरे-धीरे उस पर कब्जा कर लिया। पॉन्डिचेरी में फ्रांस के कब्जे का असर यूरोपीय देशों के साथ संबंधों पर भी हुआ।

 



 

पॉन्डिचेरी पर 1693 में डच का कब्जा हो गया। हालांकि, 1699 में यहां दोबारा फ्रांस का शासन हो गया। कई बार अंग्रेज़ों ने इस राज्य पर कब्जा किया, मगर उसे फ्रांस को लौटा दिया। भारत की आज़ादी के समय फ्रांस का 7 क्षेत्रों पर कब्जा था, जिसमें से मछलीपट्न्नम, कोझीकोड और सूरत तो आजादी के 2 महीने बाद ही भारत का हिस्सा बन गए, मगर बाकी के चार क्षेत्र (पॉन्डेचेरी, यनम, माहे और कारिकल) 1954 में भारत का हिस्सा बने। पॉन्डिचेरी केंद्र शासित प्रदेश है।

 

3. सिक्किम

उत्तर-पूर्व का ये खूबसूरत राज्य भारत की आजादी के 28 साल बाद देश का हिस्सा बना। 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना। 1642 में सिक्किम में चोग्याल वंश ने राजशाही की स्थापना की थी। चोग्याल का मतलब है संत राजा। ‘फुंतसॉग नामग्याल’ राजशाही की स्थापना कर पहले चोग्याल बने। 1890 में सिक्किम अंग्रेज़ों के शासन काल में ‘प्रोटेक्टोरेट स्टेट’ बना। ‘प्रोटेक्टोरेट स्टेट’ का मतलब है सिक्किम की सुरक्षा अब से अंग्रेज करेंगे।

 

 

1947 में सिक्किम और भारत के बीच समझौता हुआ जिसमें तय हुआ कि रक्षा, संचार और विदेश मामले भारत देखेगा लेकिन सिक्किम की आजादी बनी रहेगी। फिर 1975 में सिक्किम में जनता ने राजा के खिलाफ विद्रोह कर दिया जिसके बाद 16 मई, 1975 को सिक्किम को भारत का राज्य बन गया।

 


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