255 साल से फैल रहा है यह बरगद का पेड़, बना चुका है विश्व रिकॉर्ड

Updated on 29 Sep, 2017 at 3:07 pm

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कोलकाता के नजदीक हावड़ा में स्थित बोटैनिकल गार्डन लंबे समय से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां सबसे अधिक लोकप्रिय है एक बरगद का पेड़, जो पिछले 250 सालों से न केवल खड़ा है, बल्कि अपनी जडें लगातार बढ़ा रहा है।

इस पेड़ की टहनियों से इतनी जड़ें निकली हैं कि किसी को भी चकित कर दे।

जी हां! पश्चिम बंगाल के शिबपुर में 255 साल पुराना बरगद का एक पेड़ है। कलकत्ता के आचार्य जगदीश चंद्र बोस बोटैनिकल गार्डन में मौजूद ये विशालकाय वृक्ष अपनी संरचना के कारण लोगों में खासा चर्चा में रहता है। इसे गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसलिए दर्ज किया गया है कि इसका फैलाव बहुत ही बड़ा है। हालांकि इसके और भी गुण हैं जिससे इसे गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अलग-अलग कैटेगरी में रखा जा सकता है।

इस विशाल बरगद के पेड़ के 3618 से अधिक जड़ें हैं और यह करीब 1.6 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। दूर से देखने पर यह एक जंगल सा दिखता है, जिसमें अनेक पेड़ नजर आते हैं। हालांकि, वे पेड़ दरअसल एक ही वृक्ष के प्रॉप रूट्स हैं। चौंकाने वाली बात ये हैं कि इस पेड़ के तने को फंगल इफ़ेक्शन की वजह से 1925 में ही हटाना पड़ गया था, लेकिन लगातार बढ़ते प्रॉप रूट्स की मदद से ये आज भी ज़िंदा है और लगातार फ़ैल रहा है।

साल 1985 में इस पेड़ के चारों और एक बाड़ लगाई गई थी, जो तीन एकड़ का एरिया कवर करता था। आज 32 सालों बाद इस पेड़ के चारों तरफ इतने प्रॉप रूट्स उग आये हैं जिससे इसका दायरा बढ़कर पांच एकड़ हो गया है। बोटैनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया इस गार्डन की देखभाल करता है, जो इसे ‘द वॉकिंग ट्री’ कहना शुरू कर दिया है।


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गार्डन के सीनियर बॉटनिस्ट एम यू शरीफ़ की मानें तोः

“ये पेड़ सूरज की दिशा फ़ॉलो करते हुए पूर्व की तरफ़ बढ़ा चला आ रहा है। इस पेड़ के पश्चिम में गार्डन की बांउड्री है जिसके साथ में ही एक मेन रोड और बिल्डिंग्स आ जाती हैं। ये पेड़ प्रदूषण वाले इलाके की तरफ न बढ़कर खुले में फ़ैल रही है, लिहाजा इसका ग्रोथ बना हुआ है। लोग इस पेड़ को देखने आते हैं और इस पर झूला लगाते हैं। कई लोग पेड़ पर अपना नाम लिख देते हैं या फिर धार्मिक कारणों से इसका छोटा सा हिस्सा तोड़ कर ले जाते हैं, जिससे इसे नुकसान पहुंच सकता है। लिहाजा हमने फ़ेंसिग कर दी है।”

गौरतलब है कि 13 लोगों की टीम इस पेड़ की देखभाल करती है, जिनमें चार सीनियर बॉटनिस्ट और बाकी प्रशिक्षित गार्डनर्स हैं। वे इस पेड़ के स्वास्थ्य को लेकर बारीकी से चेकिंग करते हैं और देखभाल में लगे हैं। ढाई सदी पुराना ये पेड़ देश के लिए किसी धरोहर से कम नहीं है।

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