जंजीर नामक इस वीर कुत्ते ने अपनी बहादुरी से बचाई थी कई हजार जानें

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5:50 pm 19 Jul, 2016

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23 साल पहले मार्च 1993 में मुंबई शहर में 12 बम धमाके हुए। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इन बम धमाकों में 257 लोग मारे गए और सात सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

ये आंकड़ा 1000 तक पहुंच सकता था, अगर एक बहादुर लैब्राडोर-कुत्ता ‘जंजीर’ वहां मौजूद नहीं होता। जंजीर बम निरोधक दस्ते के साथ काम करता था।

इस जाबाज जंजीर  ने 3,329 किलो से ज्यादा विस्फोटक आरडीएक्स, 600 डेटोनेटर, 249 हथगोले और 6000 राउंड से ज्यादा जिंदा कारतूस अकेले ही खोज निकाले थे। इन सब विस्फोटकों को धमाकों में इस्तेमाल करने के लिए प्लांट किया गया था।

अब आप इसका अंदाजा लगा सकते है कि अगर जंजीर यह न खोज पाता तो और सैकड़ों जानें जा सकती थी वहीं, आर्थिक राजधानी कई और बम धमाकों से दहल सकती थी।

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मुंबई पुलिस का डॉग स्क्वॉड दिसंबर 1959 में बना था। शुरुआत में इसमें केवल 3 डॉबरमैन थे। पुलिस इन कुत्तों की मदद अपराधियों को खोजने में किया करती थी, लेकिन बढ़ते आतंकी हमले को देख बाद में इन कुत्तों को विस्फोटक, गोला बारूद को खोजने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया।



1993 में जब मुंबई में ब्लास्ट हुए उस समय मुंबई पुलिस बम निरोधक दस्ते में 6 स्क्वाड कुत्ते शामिल थे, जिनमें से एक जंजीर भी था।

जंजीर का नाम 1973 में आई बॉलीवुड की एक्शन फिल्म जंजीर के नाम पर रखा गया था। जंजीर को पुणे में शिवाजी नगर में आपराधिक जांच विभाग के ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित किया गया था।

जंजीर मुंबई पुलिस का बेहद भरोसेमंद कुत्ता था। वह बम खोजी दस्ते का एक अहम सदस्य था। 1993 के बम धमाकों के समय उसकी उम्र महज 1 साल थी।

अपना फर्ज निभाते हुए शुरुआती विस्फोट के बाद के दिनों में जंजीर ने 3 और बम खोजे निकाले थे। यानि कि अगर जंजीर तीन बमों का पता नहीं लगाता तो कई और जाने जा सकती थी, भारी तबाही का मंजर हो सकता था। मुंबई पुलिस के इस जांबाज सिपाही ने समझदारी और जाबांजी का परिचय देते हुए कई हजारों लोगों की जान बचाई।

हालांकि, आज वह इस दुनिया में नहीं है। 7 नवंबर 2000 को 8 साल की उम्र में जंजीर की मौत हो गई। जंजीर को बोन कैंसर था। हजारों की जान बचाने वाले जंजीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। उसका योगदान सराहनीय है। जंजीर की आखिरी तस्वीर हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगी।

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