Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

जानिए कारगिल में शहीद रहे परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के पराक्रम के अनजाने तथ्य

Updated on 9 September, 2017 at 9:29 am By

“या तो मैं तिरंगे को लहराकर आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर। लेकिन मुझे यकीन हैं, मैं आऊंगा ज़रूर।”

ये अंतिम शब्द भारतीय सेना के शेरशाह शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के हैं। आपने यह नाम निश्चित रूप से कारगिल युद्ध के दौरान सुना होगा, जिसे अब वक़्त के साथ भुला दिया गया है, लेकिन होना तो यह चाहिए कि देश के प्रत्येक नागरिक को भारत के इस लाल का सिर्फ़ नाम ही नही, बल्कि उसके शौर्य और उसके शहादत की कहानी पता हो।

यहाँ कुछ तथ्य आप सभी से साझा कर रहा हूँ, जिससे हम गर्व से कह सकें कि बहादुर शेरशाह इस देश की शान था।

कैप्टन विक्रम बत्रा को प्राथमिक शिक्षा उनकी माँ से ही मिली थी, जो खुद एक अध्यापिका थीं।


Advertisement

 

बत्रा भारतीय सेना के जवान थे, जो कारगिल युद्ध में दुश्मन के जवाबी हमले में घायल हुए एक अन्य जवान को बचाने के दौरान शहीद हो गए थे।

बत्रा  7 जुलाई, 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए थे, तब वो मात्र 24 साल के थे।

19 जून, 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा के नेतृत्व में भारतीय सेना ने दुश्मन के नाक के नीचे से 5140 प्वाइंट पर क़ब्ज़ा कायम करने में सफल हुई थी।

5140 प्वाइंट पर क़ब्ज़ा करने के बाद कैप्टन बत्रा ने स्वेच्छा से अगले मिशन के रूप में 4875 प्वाइंट पर भी क़ब्ज़ा करने निर्णय लिया था। यह प्वाइंट समुद्र स्तर से 17,000 फुट की उँचाई पर और 80 डिग्री सीधी खड़ी चोटी पर है।



बत्रा 7 जुलाई 1999 को इस मिशन के शुरुआती घंटों में दुश्मन के जवाबी हमले के दौरान घायल हुए एक अधिकारी को बचाने के प्रयास में भारतीय सेना की एक टुकड़ी का कमान संभाले हुए थे।

ऐसा कहा जाता है कि इस बचाव कार्य के दौरान उन्होंने घायल अधिकारी को सुरक्षित पोज़िशन पर धकेलते हुए यह कहा था कि “तुम्हारे बच्चे हैं, तुम एक तरफ हट जाओ”।

इसी मिशन में बत्रा दुश्मनो से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। उनके सम्मान में कप्तान बत्रा के नाम से विभिन्न छावनियों को नाम दिया गया, जिसपर भारतीय सेना गर्व  करती है।

2003 की फिल्म ‘एलओसी’ कारगिल युद्ध के सैनिकों के लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में बनाई गयी, जिसमें कथित तौर पर, अभिषेक बच्चन ने कैप्टन बत्रा की भूमिका निभाई थी।

शहीद कैप्टन बत्रा को उनकी मृत्यु के बाद परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।


Advertisement

शहीद कैप्टन बत्रा को अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए तो जाना ही जाता है। साथ ही  युद्ध के दौरान उनके द्वारा दिया गया नारा “ये दिल मांगे मोर” काफ़ी लोकप्रिय हुआ था।

Advertisement

नई कहानियां

सुहागरात से जुड़ी ये बातें बहुत कम लोग ही जानते हैं

सुहागरात से जुड़ी ये बातें बहुत कम लोग ही जानते हैं


नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं

नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं


मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक

मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक


PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!

PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!


अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?

अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें Military

नेट पर पॉप्युलर