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इन 10 वाद्ययंत्रों पर भारतीय संगीत टिका हुआ है

Published on 27 December, 2017 at 6:10 pm By

संगीत के माध्यम से संस्कृति को बेहतर तरीके से जाना जा सकता है। भारतीय उपमहाद्वीप में संगीत की जो परम्परा है, वो पूरे विश्व में अनमोल है। यहां के लोग स्वभावतः संगीत प्रेमी होते हैं, लिहाजा संगीत की जड़ भाषाओँ से भी पुरानी है। वैश्वीकरण और वैदेशिक आदान-प्रदान से पहले भी भारत संगीत के मामले में समुन्नत देश रहा है और इसके अपने वाद्ययंत्र हैं, जो संगीत को शीर्ष पर ले जाते हैं।


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आइये जानते हैं उन 10 भारतीय वाद्ययंत्र के बारे में जो देश की खुशबू को बिखेरते हैं।

1. पेपा

 

वैसे तो इस वाद्य यंत्र के कई नाम है, लेकिन यह पेपा के नाम से मशहूर है। इसे भैंस के सींग से बनाया जाता है और यह वाद्य यंत्र मुख्यत: असम के संगीत बिहू में बजाया जाता है। पेपा को विशेषकर पुरुष कलाकार बजाते हैं। ये बांसुरी की तरह का वाद्य होता है।

2. पखावज

 

पखावज को मृदंग के नाम से भी जाना जाता है। यह देखने में ढोलक की तरह होता है, लेकिन इसे तबले की तरह बजाया जाता है। इसका इस्तेमाल विशेषतया नृत्य आदि कार्यक्रम में किया जाता है।

3. पदायनी थप्पू

 


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इसे भारतीय ड्रम भी कहा जाता है। ऊपर का हिस्सा चमड़ा से बना होता है जबकि किनारा लकड़ी से बना होता है। इसे हाथ से बजाया जाता है।

4. अलगोजा

 

अलगोजा का उपयोग विशेषकर राजस्थानी और पंजाबी संगीत में किया जाता है। इस वाद्य यंत्र को बलोच और सिंधी संगीतकारों ने भी खूब इस्तेमाल किया है। बांसुरी की तरह दिखने वाला ये वाद्ययंत्र हाथों से बजाया जाता है।

5. सुरसिंगार

 



सुरसिंगार बहुत ही उम्दा वाद्ययंत्र है जो आकार में सरोद से बड़ा होता है। सरोद से मिलते-जुलते इस यंत्र की आवाज गहरी होती है। सुरसिंगार के तार धातु से बने होते हैं तो वहीं इसमें लकड़ी, चमड़ा भी लगा होता है।

6. गुबगुबा

 

इसे देखने में तो तबला की तरह लगता है लेकिन ये तबले से एकदम अलग है। इसे बगल में दबाकर रखते हैं और एक हाथ से बजाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नाम से लोग जानते हैं।

7. कुझाल

 

यह वाद्ययंत्र केरल से जुड़ा है, जहां ये मंदिरों और त्योहारों में दिखता है। ये वैसे तो शहनाई से मिलता-जुलता है, लेकिन इसकी ध्वनी शहनाई से थोड़ी तीखी होती है।

8. डुगडुगी

 

तमिलनाडु के लोकसंगीत में डुगडुगी को विशेष स्थान प्राप्त है, कारण यह भगवान शिव के डमरू के रूप में पहचाना जाता है। इस वाद्य यंत्र की दोनों सतह पर चोट करके संगीत सृजित किया जाता है।

9. संबल

 

इस वाद्य यंत्र को पूर्वी भारत में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सतह पर स्टिक से चोट देकर ध्वनि उत्पन्न किया जाता है। सतह चमड़े के बने होते हैं।

10. रावण हत्था

 


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इसके नाम से ही आपको पता लग गया होगा कि ये रामायण काल का वाद्य है। दरअसल, इसे भारत के कई हिस्सों में बजाया जाता है। इसका उपयोग वायलिन की तरह किया जाता है।

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